डम शराड्स क्या है? मतलब, इतिहास और खेलने का तरीका
डम शराड्स क्या है? यह इशारों से अंदाज़ा लगाने का खेल है: एक खिलाड़ी बिना बोले कोई फ़िल्म, गाना या शब्द एक्ट करता है, और उसकी टीम समय ख़त्म होने से पहले उसे पहचानती है। ‘डम’ यानी बिना बोले। भारत में यह ज़्यादातर बॉलीवुड फ़िल्मों के नाम से खेला जाता है।
डम शराड्स क्या है: नाम का मतलब
नाम के दो हिस्से हैं, और दोनों खेल के बारे में कुछ बताते हैं:
- डम: अंग्रेज़ी में इस शब्द का पुराना अर्थ है जो बोल न सके। खेल का सबसे बड़ा नियम यही है कि एक्ट करने वाला एक शब्द भी नहीं बोलेगा।
- शराड्स: यह शब्द फ़्रेंच से अंग्रेज़ी में आया। वहाँ शराड एक पहेली थी, जिसमें किसी शब्द के अलग-अलग हिस्सों के सुराग़ देकर पूरा शब्द बूझना होता था।
दुनिया के कई देशों में इसे सिर्फ़ शराड्स कहते हैं, लेकिन भारत में डम जोड़कर बोलना ही चलन में है। रोज़मर्रा की बोलचाल में लोग इसे डम शेराड्स, डमशराज़ या बस डम शराड्स कहते हैं, और मतलब सबका एक ही होता है।
यह खेल कहाँ से आया?
शराड पहले एक्टिंग का खेल नहीं, बल्कि शब्दों की पहेली थी। फ़्रांस में लोग किसी शब्द को टुकड़ों में बाँटकर हर टुकड़े पर एक छोटी पहेली बनाते थे, और सुनने वाले को टुकड़े जोड़कर पूरा शब्द बूझना होता था। अंग्रेज़ी साहित्य में भी ऐसी लिखी हुई पहेलियाँ मिलती हैं, जैसे जेन ऑस्टेन के उपन्यास एमा में।
धीरे-धीरे इंग्लैंड और यूरोप के घरों की बैठकों में लोग इन पहेलियों को बोलने की जगह एक्ट करने लगे। मेहमान छोटे-छोटे दृश्य बनाते और बाक़ी लोग अंदाज़ा लगाते। यहीं से आज का बिना बोले एक्ट करने वाला खेल बना, जो बाद में स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों के ज़रिए दुनिया भर में फैल गया।
भारत में डम शराड्स फ़िल्मों का खेल कैसे बना?
भारत में इस खेल ने अपना अलग रंग ले लिया। यहाँ फ़िल्में हर घर की बातचीत का हिस्सा हैं, इसलिए डम शराड्स धीरे-धीरे बॉलीवुड फ़िल्मों के नाम बूझने का खेल बन गया। शादी की मेहंदी हो, कॉलेज का हॉस्टल हो या रेल का लंबा सफ़र, कोई न कोई कैमरे का हैंडल घुमाकर इशारा करता है कि अब फ़िल्म का नाम आएगा।
यहाँ कुछ ख़ास इशारे भी चलन में आए, जैसे फ़िल्म के लिए पुराने कैमरे का हैंडल घुमाना, गाने के लिए मुँह से हाथ बाहर लहराना और शब्दों की गिनती उंगलियों से। पूरी सूची डम शराड्स के इशारे में है।
डम शराड्स कैसे खेलते हैं?
- कम से कम 3 खिलाड़ी चाहिए। 4 या ज़्यादा हों तो दो टीमें बनाएं।
- पर्चियों पर फ़िल्मों, गानों या शब्दों के नाम लिखकर एक कटोरे में डालें।
- एक खिलाड़ी पर्ची उठाता है और अपनी टीम के सामने बिना बोले एक्ट करता है।
- टीम के पास आम तौर पर 60 से 90 सेकंड होते हैं।
- सही अंदाज़ा लगाने पर टीम को एक पॉइंट मिलता है, फिर दूसरी टीम की बारी।
- सब खिलाड़ियों को बारी मिलने के बाद जिस टीम के ज़्यादा पॉइंट हों, वह जीतती है।
पूरे नियम और शुरुआती टिप्स के लिए डम शराड्स कैसे खेलें पढ़ें।
किस तरह के शब्द एक्ट किए जाते हैं?
| कैटेगरी | उदाहरण |
|---|---|
| बॉलीवुड फ़िल्में | शोले, सिंघम, पठान, जब वी मेट, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे |
| रोज़ के काम | खाना खाना, फ़ोन पर बात करना, चाय छानना, जूता पॉलिश करना |
| मज़ेदार काम | मच्छर मारना, खर्राटे लेना, बिजली जाने पर मोमबत्ती ढूँढना |
| भारतीय खेल और परंपराएं | तिलक लगाना, नारियल फोड़ना, गिल्ली डंडा खेलना |
फ़िल्मों वाले उदाहरण फ़िल्में डेक से हैं, और बाक़ी करके दिखाओ डेक से, जो नए खिलाड़ियों के लिए सबसे आसान शुरुआत है।
डम शराड्स इतना पसंद क्यों किया जाता है?
इस खेल की ख़ूबी इसकी सादगी है। इसके लिए न बोर्ड चाहिए, न बिजली, न कोई ख़ास जगह। रेल का डिब्बा, शादी का पंडाल या बिजली गई हुई शाम, कहीं भी शुरू हो सकता है।
- हर उम्र का खेल: चार साल का बच्चा हाथी बन सकता है और दादाजी पुरानी फ़िल्म का नाम बूझ सकते हैं।
- भाषा की दीवार नहीं: इशारों की भाषा सब समझते हैं, इसलिए अलग राज्यों और भाषाओं के लोग साथ खेल सकते हैं।
- टीम का खेल: एक-दूसरे के इशारे समझने की कोशिश में लोग क़रीब आते हैं।
- हँसी की गारंटी: ग़लत अंदाज़े अक्सर सही जवाब से ज़्यादा मज़ेदार होते हैं।
आज लोग डम शराड्स कैसे खेलते हैं?
पर्चियों वाला पुराना तरीक़ा आज भी सबसे ज़्यादा चलता है, लेकिन अब इसके कई रूप हैं:
- क्लासिक पर्ची वाला खेल: दो टीमें, कटोरे में पर्चियाँ और एक घड़ी।
- फ़ोन माथे पर रखकर: एक खिलाड़ी फ़ोन माथे पर रखता है, दोस्त कार्ड एक्ट करते हैं और वह अंदाज़ा लगाता है। Act Up ऐप इसी तरह काम करता है, फ़ोन झुकाकर पॉइंट या पास होता है।
- वीडियो कॉल पर: दूर बैठे परिवार के साथ कैमरे के सामने एक्ट करके।
- रिवर्स रूप: पूरी टीम एक्ट करती है और सिर्फ़ एक व्यक्ति अंदाज़ा लगाता है।
रूप कोई भी हो, दिल वही रहता है: बिना बोले समझाना और साथ में हँसना।