डम शराड्स के इशारे: फ़िल्म, गाना और शब्द बताने के संकेत
डम शराड्स के इशारे एक छोटी-सी भाषा हैं: फ़िल्म के लिए आँख के पास कैमरे का हैंडल घुमाना, गाने के लिए मुँह से हाथ बाहर फैलाना, शब्दों की गिनती के लिए उंगलियां, छोटे शब्द के लिए अंगूठा-उंगली पास लाना और मिलती-जुलती आवाज़ के लिए कान पकड़ना।
डम शराड्स के इशारे: सबसे पहले श्रेणी कैसे बताएं?
हर बारी की शुरुआत श्रेणी से होती है। इससे टीम का दिमाग़ सही दिशा में दौड़ता है।
| श्रेणी | इशारा | उदाहरण |
|---|---|---|
| फ़िल्म | एक मुट्ठी आँख पर, दूसरे हाथ से कैमरे का हैंडल घुमाना | शोले, पठान |
| गाना | मुँह के पास से दोनों हाथ बाहर फैलाना | गेरुआ, लुंगी डांस |
| टीवी शो | दोनों हाथों की उंगलियों से हवा में चौकोर बनाना | रामायण, हम पाँच |
| किताब | दोनों हथेलियां जोड़कर किताब की तरह खोलना | कोई भी कहानी की किताब |
| मुहावरा या कहावत | दोनों हाथों से हवा में उलटे कॉमा बनाना | नौ दो ग्यारह होना |
| व्यक्ति | सीधे खड़े होकर अपनी ओर दोनों हाथों से इशारा | अमिताभ बच्चन |
फ़िल्में और गाने डेक भारतीय खेल की जान हैं, इसलिए पहले दो इशारे सबसे ज़्यादा काम आते हैं।
शब्दों की गिनती और कौन सा शब्द, यह कैसे दिखाएं?
- कुल शब्द: श्रेणी के बाद उतनी उंगलियां उठाइए जितने शब्द नाम में हैं। ‘जब वी मेट’ के लिए तीन।
- कौन सा शब्द: फिर जिस शब्द से शुरू करना है, उसका नंबर उंगलियों से दिखाइए। तीसरा शब्द है तो तीन उंगलियां।
- पूरा नाम एक साथ: दोनों बाँहें फैलाकर हवा में बड़ा घेरा बनाइए। इसका मतलब है ‘अब पूरा नाम एक सीन में दिखा रहा हूँ।’
- शब्दांश (सिलेबल): लंबे शब्द को टुकड़ों में बाँटना हो तो बाँह पर उंगलियां रखकर टुकड़ों की गिनती दिखाइए। पहला टुकड़ा, तो एक उंगली बाँह पर।
छोटे शब्द ‘का’, ‘की’, ‘है’ कैसे बताएं?
हिंदी फ़िल्मों के नामों में ‘का’, ‘की’, ‘के’, ‘है’, ‘में’, ‘और’ जैसे छोटे शब्द बहुत आते हैं: ‘ये मेरा दीवानापन है’, ‘बंटी और बबली’, ‘प्यार हुआ इक़रार हुआ’। इनकी एक्टिंग में समय बर्बाद मत कीजिए।
- छोटा शब्द: अंगूठा और पहली उंगली पास लाकर छोटा सा फ़ासला दिखाइए। टीम को ज़ोर-ज़ोर से ‘का, की, के, है, में’ बोलने दीजिए, सही वाले पर नाक छू दीजिए।
- ‘और’: दोनों हाथों की पहली उंगलियों को आपस में फँसाइए, जैसे दो चीज़ें जुड़ रही हों।
- ‘है’: कई ग्रुप ज़मीन की तरफ़ हथेली दबाकर ‘यहीं है’ दिखाते हैं।
ज़्यादातर बार छोटे शब्द छोड़कर बड़े शब्द पहले कीजिए। ‘बंटी’ और ‘बबली’ मिल गए तो ‘और’ टीम ख़ुद भर देगी।
‘सुनने में मिलता-जुलता’ इशारा कब काम आता है?
जब कोई शब्द सीधे एक्ट करना मुश्किल हो, तब कान पकड़िए और उससे मिलती आवाज़ वाला शब्द कीजिए।
| असली शब्द | मिलता-जुलता शब्द | क्या करें |
|---|---|---|
| सिंघम | सिंह | शेर की तरह पंजा और दहाड़ता चेहरा |
| गेरुआ | गेरू | दीवार पर रंग पोतना |
| बर्फ़ी | बर्फ़ | ठंड से काँपना |
| मसान | मकान | हाथों से छत बनाना और ईंटें जोड़ना |
आवाज़ निकालो जैसा डेक इस हुनर को तेज़ करने के लिए अलग से खेला जा सकता है, बस उस राउंड में आवाज़ की छूट होती है।
सही, गलत और ‘करीब हो’ कैसे बताएं?
टीम लगातार अंदाज़ा लगाती है, एक्टर को उन्हें सही दिशा में धकेलते रहना है:
- बिल्कुल सही: एक हाथ से नाक छुइए और दूसरे से उस खिलाड़ी की ओर इशारा।
- करीब हो, और बोलो: दोनों हाथों से अपनी तरफ़ बुलाने का इशारा।
- गलत दिशा: हाथ हिलाकर मना या सिर ना में हिलाइए।
- बड़ा करो या छोटा करो: हाथों को खींचकर दूर ले जाएं तो शब्द बड़ा करो (जैसे ‘दोस्त’ से ‘दोस्ती’), पास लाएं तो छोटा।
- भूतकाल: अंगूठे से कंधे के पीछे इशारा, यानी ‘था’ या ‘थे’।
- बहुवचन: दोनों हाथों की छोटी उंगलियां आपस में फँसाइए, यानी शब्द एक से ज़्यादा का है, जैसे ‘दोस्त’ नहीं ‘दोस्तों’।
एक पूरा उदाहरण: ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ इशारों में
मान लीजिए विरोधी टीम ने कान में यह नाम बताया। इशारों का क्रम कुछ ऐसा होगा:
- फ़िल्म का इशारा: आँख पर मुट्ठी, कैमरे का हैंडल घुमाइए। टीम बोलेगी ‘फ़िल्म!’ और आप नाक छू देंगे।
- तीन उंगलियां: नाम में तीन शब्द हैं।
- दूसरा शब्द पहले: दो उंगलियां दिखाइए, फिर किसी बड़े भाई की तरह कंधे चौड़े करके छोटे को गले लगाइए। टीम ‘भाई’ बोल दे तो नाक छुइए।
- तीसरा शब्द: तीन उंगलियां, फिर गले में स्टेथोस्कोप लटकाने और किसी की धड़कन सुनने की एक्टिंग। ‘डॉक्टर’ आया तो हाथ से ‘और आगे’ का इशारा, जब तक कोई ‘एमबीबीएस’ न बोले।
- पहला शब्द ज़रूरी ही नहीं: ‘भाई’ और ‘एमबीबीएस’ मिलते ही ज़्यादातर टीमें पूरा नाम चिल्ला देती हैं।
इस उदाहरण से एक बात साफ़ है: सबसे आसान शब्द से शुरुआत कीजिए, क्रम से नहीं। इशारे सिर्फ़ टीम को रास्ता दिखाते हैं, असली काम एक्टिंग करती है।
कौन से घरेलू इशारे पहले से तय कर लें?
कुछ इशारे हर परिवार में अलग होते हैं। खेल से पहले बस एक मिनट में ये तय कर लें:
- हिंदी और अंग्रेज़ी फ़िल्म में फ़र्क कैसे दिखाएंगे
- पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म के लिए कोई ख़ास इशारा चाहिए या नहीं
- वेब सीरीज़ को टीवी शो माना जाएगा या अलग श्रेणी
- ‘पूरा नाम’ वाला घेरा कब बनेगा
इशारे तय हो जाएं तो बाकी नियमों के लिए डम शराड्स के नियम पढ़ लीजिए, ताकि बीच खेल में कोई बहस न हो।