परिवार के साथ डम शराड्स: दादी से पोते तक, सबके लिए आइडिया
परिवार के साथ डम शराड्स में हर टीम में दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे मिलाइए, और शब्द ऐसे रखिए कि हर पीढ़ी को अपना मौका मिले: बड़ों के लिए पुरानी फ़िल्में, बच्चों के लिए कार्टून और जानवर, और सबके लिए रिश्तों वाले शब्द जैसे मामी, फूफा और जीजा।
परिवार के साथ डम शराड्स: तीन पीढ़ियों वाली टीम कैसे बनाएं?
संयुक्त परिवार में या त्योहार पर जब सब इकट्ठा होते हैं, तो एक कमरे में सत्तर साल की दादी और सात साल का पोता साथ बैठे होते हैं। अगर टीमें उम्र के हिसाब से बनीं, जैसे ‘बड़े बनाम बच्चे’, तो एक टीम हर बार हारेगी। बेहतर तरीका:
- सबको तीन ग्रुप में बाँटिए: बड़े, जवान और बच्चे।
- हर ग्रुप से बारी-बारी टीमों में बाँटिए, ताकि दोनों टीमों में हर उम्र के लोग बराबर हों।
- पति-पत्नी और भाई-बहन अलग टीमों में, वरना वे आँखों से ही जवाब समझ जाते हैं।
- हर टीम का एक कप्तान बच्चा हो। बच्चे इस ज़िम्मेदारी से बहुत ख़ुश होते हैं।
दादा-दादी के लिए पुरानी फ़िल्में
बड़ों का असली खेल पुरानी फ़िल्मों में होता है, जहाँ बच्चे सिर खुजाते रह जाते हैं और दादी एक इशारे में नाम बता देती हैं। फ़िल्में डेक से:
| फ़िल्म | एक्टिंग का इशारा |
|---|---|
| मुग़ल-ए-आज़म | शाही ताज, फिर अनारकली की तरह नाचना |
| शोले | दो दोस्त मोटरसाइकिल पर, या गब्बर की चाल |
| सत्यकाम | हाथ दिल पर रखकर सच की कसम |
| करण अर्जुन | दो भाई बिछड़ते हैं, फिर गले मिलते हैं |
| दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे | सरसों के खेत में बाँहें फैलाना |
| अंदाज़ अपना अपना | दो दोस्त एक-दूसरे को धक्का देकर आगे निकलने की कोशिश |
ऐसे नाम हर राउंड में एक-दो ज़रूर रखिए, ताकि बड़े भी उतने ही जोश में रहें।
बच्चों के लिए कार्टून
अब बारी बच्चों की, जहाँ दादा-दादी हैरान दिखेंगे। कार्टून डेक से:
- छोटा भीम: लड्डू खाना और फिर बाँहों की ताक़त दिखाना।
- निंजा हथौड़ी: दबे पाँव चलना और हाथ जोड़कर गायब होना।
- कृष्णा कार्टून: बाँसुरी बजाना और माखन की मटकी।
- पिकाचू, मिनियन्स, कुंग फ़ू पांडा: बड़े बच्चों के लिए।
डेक के अलावा अपने घर के बच्चों के सबसे पसंदीदा कार्टून भी पर्चियों में ज़रूर जोड़िए, क्योंकि हर घर की पसंद अलग होती है।
मज़ा तब आता है जब कार्टून की पर्ची दादाजी के हाथ लगती है और पोता उन्हें धीरे से समझाता है कि छोटा भीम कौन है।
रिश्तों की एक्टिंग: सबसे परिवार वाला राउंड
परिवार डेक भारतीय रिश्तों से भरा है, और हर रिश्ते की एक्टिंग में घर की कोई न कोई याद छिपी होती है:
- दादी: झुककर चलना, चश्मा और प्यार से सिर पर हाथ फेरना।
- नानी: कहानी सुनाने का भाव और गोद में बच्चे को सुलाना।
- फूफा: नाराज़ होकर मुँह फुलाना, शादी में सबसे ज़्यादा रूठने वाले की तरह।
- जीजा: शादी में आगे-आगे घूमना और कॉलर ठीक करना।
- भाभी: मेहमानों के लिए ट्रे लेकर आना।
- बड़ा भाई: छोटे पर रौब दिखाना और फिर उसकी रक्षा करना।
- रिश्ते में चाचा लगते हैं: उंगलियों पर रिश्ता गिनते हुए उलझ जाना। यह कार्ड हर बार हँसी लाता है।
बस एक ध्यान रखें: एक्टिंग रिश्ते की हो, कमरे में बैठे किसी असली फूफा जी की नहीं।
जानवर: हर उम्र का साझा मैदान
जब बीच में किसी को लगे कि खेल उसके लिए नहीं है, तो जानवरों का एक राउंड सबको फिर से जोड़ देता है। हाथी, कौआ, कुत्ता, हिरण, कोबरा और चमगादड़, इन सबको सात साल का बच्चा भी पहचानता है और सत्तर साल की दादी भी। छोटे बच्चों के लिए और शब्द बच्चों के लिए डम शराड्स में हैं।
त्योहारों पर परिवार के साथ कैसे खेलें?
- दिवाली की रात: पूजा के बाद, मिठाई के साथ। त्योहार से जुड़े शब्द, जैसे दीये, रंगोली, पटाखे।
- होली की शाम: रंग खेलने के बाद थके हुए सब, बैठे-बैठे वाला राउंड।
- रक्षाबंधन: भाई-बहन बनाम मम्मी-पापा, और हारने वाली टीम सबके लिए मिठाई परोसे।
- बिजली गई हुई शाम: टॉर्च की रोशनी में एक्टिंग, जिसमें परछाईं भी किरदार बन जाती है।
- गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर: हर दोपहर एक नया डेक।
- शादी से पहले की रात: दोनों परिवारों को मिलाकर टीमें, ताकि नए रिश्तेदार जल्दी घुल-मिल जाएं।
नियम जो सबके लिए निष्पक्ष हों
परिवार के खेल में जीत से ज़्यादा ज़रूरी है कि कोई अकेला या पीछे छूटा महसूस न करे। इसलिए ये छोटे बदलाव कीजिए:
| नियम | क्यों |
|---|---|
| छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को 30 सेकंड ज़्यादा | उन्हें सोचने और हिलने-डुलने में ज़्यादा समय लगता है |
| बैठकर एक्टिंग की छूट | घुटनों के दर्द वाले बड़े भी पूरा हिस्सा ले सकें |
| छोटे बच्चे गलती से बोल दें तो दोबारा मौका | डर से बच्चे अगली बार हाथ नहीं उठाते |
| पर्ची पढ़ने में मदद | जो बच्चे पढ़ नहीं सकते, उनके कान में शब्द बताइए |
| अंपायर घर के सबसे बड़े | उनकी बात पर कोई बहस नहीं करता |
हर राउंड के बाद ‘सबसे अच्छी एक्टिंग’ की तारीफ़ भी कीजिए, सिर्फ़ जीतने वाली टीम की नहीं। अक्सर यही तारीफ़ दादी के चेहरे पर सबसे बड़ी मुस्कान लाती है।