डम शराड्स के लिए फ़िल्मों के नाम: बॉलीवुड की बेहतरीन सूची
डम शराड्स के लिए फ़िल्मों के नाम ऐसे चुनें जिन्हें पूरा ग्रुप जानता हो: शोले, सिंघम, पठान, हेरा फेरी और जब वी मेट। छोटे नामों से शुरू करें, फिर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे’ जैसे लंबे नाम और ‘मुग़ल-ए-आज़म’ जैसी क्लासिक लाएं।
भारत में डम शराड्स फ़िल्मों से ही क्यों खेला जाता है?
हमारे यहाँ यह खेल असल में फ़िल्मों का खेल बन चुका है। परिवार की शादी हो, कॉलेज का फ़ेस्ट हो या हॉस्टल की रात, कोई न कोई कैमरे का हैंडल घुमाकर इशारा करता है और सब समझ जाते हैं कि अब फ़िल्म का नाम आने वाला है। फ़िल्मी नाम इसलिए अच्छे चलते हैं क्योंकि उनमें कहानी, किरदार और मशहूर डायलॉग पहले से सबके दिमाग़ में होते हैं, इसलिए एक छोटा इशारा भी बहुत कुछ बता देता है।
नाम चुनते समय एक बात याद रखें: पर्ची पर वही फ़िल्म लिखें जिसे कमरे में बैठे ज़्यादातर लोगों ने देखा हो या कम से कम उसका नाम सुना हो। दादी के साथ खेल रहे हैं तो पुरानी फ़िल्में मिलाइए, कॉलेज के दोस्तों के साथ नई।
डम शराड्स के लिए फ़िल्मों के नाम: पहले राउंड की आसान फ़िल्में
ये नाम फ़िल्में डेक के आसान कार्डों में से हैं और लगभग हर ग्रुप में तुरंत पहचाने जाते हैं।
| फ़िल्म | एक्ट करने का तरीका |
|---|---|
| शोले | घोड़े पर सवार होकर बंदूक चलाएं, फिर गब्बर की तरह कमर पर हाथ रखें |
| सिंघम | मूँछ पर ताव दें और पुलिस वाले की तरह सीना तानकर चलें |
| पठान | एक्शन हीरो की तरह छलाँग और लंबे बालों को झटका |
| जब वी मेट | ट्रेन में बैठे हों और सामने वाला लगातार बोल रहा हो, ऐसा दिखाएं |
| मुझसे दोस्ती करोगे | हाथ आगे बढ़ाकर दोस्ती का हाथ मिलाने का इशारा |
| अनारकली | सिर पर घूँघट और शाही अंदाज़ में धीरे चलना |
मज़ेदार फ़िल्में: जिन पर सबसे ज़्यादा हँसी आती है
कॉमेडी फ़िल्में एक्ट करने में सबसे ज़्यादा मज़ा देती हैं, क्योंकि उनके दृश्य पहले से ही मज़ेदार होते हैं। ये सब फ़िल्में डेक के फ़नी कार्ड हैं:
- हेरा फेरी: फ़ोन उठाकर हैरान चेहरा बनाएं, जैसे ग़लत नंबर लग गया हो।
- मुन्ना भाई एमबीबीएस: किसी को कसकर गले लगाएं, यानी जादू की झप्पी।
- अंदाज़ अपना अपना: दो दोस्तों की होड़ दिखाएं, जो बारी-बारी से एक-दूसरे को धक्का देकर आगे निकलें।
- वेलकम: दोनों हाथ फैलाकर स्वागत करने का बड़ा सा इशारा, फिर पेंटिंग बनाने का।
- बंटी और बबली: दो लोगों की जोड़ी जो किसी को चालाकी से कुछ बेच रही हो।
- शुभ मंगल सावधान: शादी के फेरे और फिर अचानक घबराया हुआ चेहरा।
मुश्किल फ़िल्में: पक्के फ़िल्मी कीड़ों के लिए
जब ग्रुप गरम हो जाए तो ये नाम निकालिए। इनमें कुछ पुरानी क्लासिक हैं और कुछ ऐसे नाम जिन्हें इशारों में बताना सच में चुनौती है:
- मुग़ल-ए-आज़म: ताज पहनने और फिर शाही दरबार का इशारा करें। नाम का हर हिस्सा अलग से समझाना पड़ेगा।
- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे: चार उंगलियाँ दिखाकर चार शब्द बताएं। ज़्यादातर ग्रुप चलती ट्रेन से हाथ बढ़ाने वाले दृश्य से तुरंत पकड़ लेते हैं।
- पान सिंह तोमर: पहला शब्द पान खाने के इशारे से, फिर तेज़ दौड़ का अभिनय।
- मसान: नदी किनारे बैठकर उदास चेहरा, यह आसान नहीं है।
- सत्यकाम: 1969 की क्लासिक फ़िल्म, सिर्फ़ उन ग्रुपों के लिए जिनमें पुरानी फ़िल्मों के शौक़ीन हों। सच की कसम खाने का भाव और फिर ‘काम’ के लिए मेहनत का अभिनय, दोनों टुकड़े अलग-अलग दिखाने पड़ते हैं।
लंबे हिंदी फ़िल्मी नाम को इशारों में कैसे बताएं?
हिंदी नामों में अक्सर का, की, है, और जैसे छोटे शब्द होते हैं, जो इशारों में सबसे ज़्यादा उलझाते हैं। यह तरीका अपनाएं:
- कैमरे का हैंडल घुमाकर बताएं कि यह फ़िल्म है।
- उंगलियों से कुल शब्दों की गिनती दिखाएं।
- फिर बताएं कि आप कौन सा शब्द एक्ट कर रहे हैं, जैसे दूसरे शब्द के लिए दो उंगलियाँ।
- छोटे शब्द के लिए अंगूठा और उंगली पास लाएं। टीम आम तौर पर का, की, है बोलकर खुद भर देती है।
- किसी शब्द से मिलता-जुलता शब्द एक्ट करना हो तो कान पकड़कर “सुनने में ऐसा” का इशारा करें।
- अगर कोई मशहूर दृश्य या पोज़ है, तो शब्द तोड़ने से पहले उसी को आज़माएं। अक्सर पूरी फ़िल्म एक ही पोज़ में पकड़ में आ जाती है।
इशारों की पूरी सूची के लिए डम शराड्स के इशारे वाली गाइड देखें।
किरदार, एनिमेटेड और हॉरर: फ़िल्मों के और राउंड
सिर्फ़ फ़िल्मों के नाम से ऊब हो जाए तो राउंड बदलिए:
- फ़िल्मी किरदार: बसंती (ताँगा चलाते हुए बिना रुके बोलना), मुन्ना भाई, सर्किट, मिस्टर इंडिया, भल्लालदेव, राजू रस्तोगी। ये फ़िल्मी किरदार डेक के कार्ड हैं।
- बच्चों वाला राउंड: हनुमान, बाल गणेश, मोटू पतलू की फ़िल्म, डोरेमॉन की मूवी, सिंबा, एल्सा। ये एनिमेटेड फ़िल्में डेक के कार्ड हैं और छोटे बच्चे भी आराम से एक्ट कर लेते हैं।
- हल्का डरावना राउंड: स्त्री, भूल भुलैया, भूतनाथ, गोलमाल का भूत। ये हॉरर फ़िल्में डेक से हैं, और इनमें डर से ज़्यादा हँसी होती है।
फ़िल्मों का राउंड खेलने के कुछ काम के नियम
- हर टर्न के लिए 60 से 90 सेकंड रखें। लंबे नाम वाली फ़िल्मों में 90 सेकंड ठीक रहते हैं।
- बोलना, होंठ हिलाकर शब्द बताना और किसी चीज़ की तरफ़ इशारा करके उसका नाम बताना मना है।
- हीरो का नाम या डायलॉग बोलकर नहीं बताया जा सकता, लेकिन उसकी मशहूर अदा की नकल चल सकती है।
- अगर कोई फ़िल्म किसी ने न सुनी हो, तो बिना पॉइंट काटे नई पर्ची उठाने दें।
फ़ोन पर तैयार कार्डों के साथ खेलना हो तो Act Up ऐप में फ़ोन माथे पर रखते हैं, दोस्त एक्ट करते हैं और फ़ोन झुकाकर पॉइंट या पास होता है। बिना कुछ डाउनलोड किए ब्राउज़र में मुफ़्त भी खेल सकते हैं।